जन्म के साथ ही अन्तर्जाल का बचपन भी मुख्यत: अमेरिका में बीता। इससे वह पूरा का पूरा अंगरेजीमय हो गया था, पर उसके किशोरावस्था में पहुँचते ही स्थिति तेजी से बदली।
"इन्टर्नेट की स्थिति,२०००" नामक रिपोर्ट में अमेरिकी इन्टरनेट काउन्सिल (USIC) ने जो सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाला वह यह था कि वैश्वीकरण के दबाव के फलस्वरूप अन्तर्जाल तेजी से बहुभाषी, बहु-संस्कृति तथा बहुध्रुवीय होता जा रहा है। अगले वर्ष सन २००१ के अपने रिपोर्ट में उन्होने घोषणा की, "यह महत्वपूर्ण है कि अंतर्जाल पर अंगरेजी मातृभाषा वालों का प्रभुत्व समाप्त हो गया है और उनकी संख्या अंतर्जाल पर आनलाइन आबादी का केवल 45% ही रह गयी है।"
अंतर्जाल पर बढती भाषा विविधता का असली कारण यह है कि लोग अपनी भाषा में पढना-लिखना पसन्द करते हैं। यूनिकोड के आगमन और अंतर्जाल के मल्टीमिडिया होते स्वरूप के कारण अंतरजाल पर भाषा-विविधता को बढावा मिल रहा है। इस दिशा में मशीनी अनुवाद तथा अन्य भाषा तकनीकियों से भी काफी सहायता मिल रही है।
अंतर्जाल पर भारतीयों की संख्या भी तेजी से बढ रही है। आशा करनी चाहिये कि हिन्दी आदि भारतीय भाषायें अगले पाँच-छ: वर्षों में अंतर्जाल पर अपना सम्मानपूर्ण स्थान प्राप्त कर लेंगी।
१९९८ से २००४ तक का बहुभाषी अंतर्जाल के आँकडे (विकिपेडिया)
अंतर्जाल पर प्रयुक्त 10 प्रमुख भाषायें
अधिकतम अंतर्जाल प्रयोक्ताओं वाले २० प्रमुख देश
22 July, 2006
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3 comments:
गूगल की एक और खबर आपने ही दी थी शायद कि हिन्दी भी आने वाले कुछ वर्षों में अंग्रेजी से लोहा लेने लगेगी - इंटरनेट पर सामग्री और पृष्ठों के मामले में :)
जी हाँ, मैने इस समाचार को उद्धृत किया था:
Google predicts India will be largest net market
http://www.siliconindia.com/shownewsdata.asp?newsno=31954
अनुनद के बच्चे...इत्नि मुस्किल मे तो हनुमन सिन्घ भि हार मान जयेग. अबे ये.ंऐन भि MP मे थ.ॅसि कोइ हिन्दि बोल्त है सले?
आप भूल क्यो जते हैन कि नोर्थेर्न इन्दिअन मैन हिन्दुस्तनि/उर्दू बोलि जति हैन.ऽउर ऐसे पन्दितनि प्र्यत्न बहुत अर्तिफ़िcइअल लग्ति है..
अनुनद भय्य, अप्प्ने अन्त्रजाल (ह ह ) तो बनय पेर मुल्तिमेदिअ को अनुवाद (अनुनद?) नहै किय??
दम्न ब्रो
सन्जय
Mइअमि ऊSआ
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